रविवार, 29 जनवरी 2023

इंसानियत ही न बची किसी मे

 

 "इंसानियत ही न बची किसी मे  ,

हर एक इंसान चालक बना बैठा है ।

जख्म तो दिखते हैं दुसरो के, उसको,

मगर फिर भी अनजान बना बैठा है।।

कुछ किताबें पढ़ कर नसीहते दिया करते हैं अक्सर,

सिर्फ वही इंसान इस समाज मे बेरोजगार बना बैठा है।

लोग अपनी असफलताओं का जिम्मेदार बताते हैं दूसरों को अक्सर,

आज वही इंसान अंदर से  कमजोर बना बैठा है ।।

छुपा लेता है अपनी गलतियों को अक्सर,

जाने कितने इल्जाम अपने  दिल में लिए बैठा है ।

मोहब्बत का इजहार न कर पाया किसी से वो,

जाने कितनी जिमेदारीयों का बोझ दिल में लिए बैठा है ।।

इंसानियत  ही न बची किसी मे ,

हर एक इंसान चालक बना बैठा है ।।"

रविवार, 12 जुलाई 2020




 इस दुनिया की सच्चाई को बदल रहा इंसान हैं,
मदद ना करना तुम किसी का अब मिल रहा यही संस्कार है।
कागज कलम दवात नाम  के ही अब सामान है,
चंद रुपयों के खातिर यहां बिकता जिनका ईमान है।
प्रेम सद्भावना अब रही ना इनमें,
हीन भावना और मतलब से सजा यहां बाजार है।
खुद में कभी ना बदलाव है लाता  मगर बदलना चाहता है समाज को,
 किस घमंड में चूर है दुनिया 1 दिन मरना है इंसान को,
 कागज के टुकड़ों को बना लिया है देवता बेंच रहा है खुद के ईमान को।
 समझ जाओ ऐ दुनिया वालों दया सब के प्रति दिखलाओ,
  बचा है मौका पास तुम्हारे खुद को साबित करके दिखलाओ।

- श्याम जी प्रजापति






  हांँ हमें बेपनाह मोहब्बत  भी है उनसे,
 और कई बार शिकवे गिले भी रहते हैं।

  हांँ उनकी  आवाज बसी रहती है रोम रोम में मेरे,
 बस बातों पर उनके ज्यादा ध्यान नहीं रहता है।

  हाँ कभी-कभी  झूठ बोलना पड़ जाता है  उनसे,
 मगर यह बात उनको भी पता रहती है  अक्सर।

 हांँ कभी-कभी याद में उनके बरस पड़ते हैं  आंसू,
 मगर यही  पल एहसास दिलाता है मोहब्बत का  उनके।

 हांँ  मुलाकात नहीं होती है उनसे औरों की तरह,
 मगर जब होती है मुलाकात तो हर एक पल को  समेट लेते हैं।
                                     - श्याम जी प्रजापति

बुधवार, 25 जुलाई 2018

हॆ गणित देवी
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हे गणित देवी शत -शत प्रणाम,मैं आपको शीश झुकता हूँ,
आपकी औकात क्या है मैं बताता हूँ,

सुनते ही तेरा नाम काँप जाता है शरीर मेरा.
उठकर बैठ जाता हूँ पा ध्यान स्वप्न मे भी तेरा !

तेरी सूत्रों की माला कॊ दिन रात जपा मैं करता हूँ.
और फेल हो जाता हूँ तो भाग्य कोसने लगता हूँ.

श्री धराचार्य की परम प्रिये,आचार्य भास्कर की दादी,
न जाने कितने लडको की कर डाली तू ने बर्बादी,

बन गये बहूत अभिशाप पात्र,इस आर्यभट्ट की नानी ने.
डिप्लोमा तो कब का कर लेते पर हार गये गणित भवानी से,

तुम्हारा नाम सुन कर हम सब मन ही मन रो लेते है,
इस जीवन मे J E बनने की अभिलाषा खो देते है,

बीजगणित ने बो रखें है बीज असफलता के.
अंकगणित ने खो  डाला आत्मविश्वास जड़ से,

त्रिकोणमिती से अपना 36 का नाता है.
ऊँचाई और दूरी का सम्बन्ध समझ मे नही आता है,

समाकलन अवकलन  आदि के प्रश्न लगे मुझे दोषी.
सूत्रों कॊ जब याद करूँ तो आने लगती है बेहोशी,

नेर्देशान्क ठोस ज्यामिति बिन्दु दर बिन्दु  नचाती है.
"वेक्टर "के लिये बैठा हूँ तो नींद मेरी फैक्टर कर जाती है.
चिढ़ है मुझे गणितज्ञों से सूत्र बनाये जीन -जीन ने.
छपने मे समय नहीँ लगता है रट पाते है दिन भर मे,

सिधान्त बना कर चले गये.पढ़ना तो हमको पड़ता है.
उनकी छोटी सी गलती का अंजाम भुगतना पड़ता है.

डिप्लोमा मे रह कार कब तक फेल कराओगी.
डिग्री सेक्शन मे शोभामान रहो सम्मान असीमित पओगी.

जिस दिन तेरे जाने का समाचार अपने कानो से सुन पाऊँगा.
प्रसाद चढ़ा कर राम -राम कीर्तन करवाऊंगा.      

                                             -shyam ji prajapati 

शुक्रवार, 22 जून 2018

"Hasrate itni si thi tujhe pane ki"

Hasrate itni si thi tujhe pane ki.. 
Sath me tere is duniya me kho jane ki.. 
Haan himmat to thi dono ke pass duniya se lad jane ki.. 
Kiye bhi kosis lakh sabko manane ki.. 
Dastoor is jamane ka dekho samjh hi nahi bachi humko samjh pane ki.. 
Wada bhi kiya toot bhi gaya apno ka sath nibhane me.. 
Todna pada wada ek dosre wade ko nibhane me...  
Aarjoo nahi bachi is dil me ab dobara dil lagane ki.. 
Hasrate itni si thi tujhe pane ki.. 

शनिवार, 14 दिसंबर 2013

""""""""""""""" BETI """""""""""""""""

AAP MUJHE EK BAAT BATAO,
KYO SAB KARTE HAIN YE PAAP BATAO,
                     
                     LADKO KO DETE HAIN SAMMAN BAHUT,
                      HUMKO KARTE HAIN NAZAR ANDAZ BATAO,

KYA HUM NAHI KER SAKTE VE KAAM SAB,
JO LADKE KARTE HAIN KAAM BATAO,
                      
                       JANAM LENE SE PAHLE HI,
                        KYO DETE HO HUMKO MAAR BATAO,

PARIVAR BANA SAMAJ BANA HUMSE HI SANSAR BANA,
CHAL PAEGA YE SANSAR BINA HUMARE YE AAP BATAO,
                        
                       KYO SAB KARTE HAIN YE PAAP BATAO ,
                        AAP MUJHE EK BAAT BATAO.    

                                                                                                             FROM-SHYAMJIPRAJAPATI

मंगलवार, 20 नवंबर 2012

MY SHORT POEM ON "LIFE"

 Kahani  Kahun  Ya  Jubani  Kahun........
Khilte Hue Phool Ki Tarah Khushali Hai Jindagi ,
                          Kabhi Khushi Kahbi Gum Ke Male....
                         Aur Sapno Se Saji Fulwari Hai Jindagi ,
Aasuon Me Doobi Kasti To Kabhi....
Sahil    Ka   Kinara   Hai   jindagi ,
                           Khoobsurat Aur Hasheen Bhaonao Se Bhari...
                           Rishto  Ke  MAIL  Se  Bani  Mala  Hai    Jindagi ,
Aatma Aur Sarir ke Mate Se Bani...
Bahti  Hui  Dhara  Hai  Jindagi ,
                             Kahani Kahun Ya Jubani Kahun.....
                             Kitni Haseen Aur Pyari Hai Jindagi ,