हांँ हमें बेपनाह मोहब्बत भी है उनसे,
और कई बार शिकवे गिले भी रहते हैं।
हांँ उनकी आवाज बसी रहती है रोम रोम में मेरे,
बस बातों पर उनके ज्यादा ध्यान नहीं रहता है।
हाँ कभी-कभी झूठ बोलना पड़ जाता है उनसे,
मगर यह बात उनको भी पता रहती है अक्सर।
हांँ कभी-कभी याद में उनके बरस पड़ते हैं आंसू,
मगर यही पल एहसास दिलाता है मोहब्बत का उनके।
हांँ मुलाकात नहीं होती है उनसे औरों की तरह,
मगर जब होती है मुलाकात तो हर एक पल को समेट लेते हैं।
- श्याम जी प्रजापति
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