बुधवार, 25 जुलाई 2018

हॆ गणित देवी
*****************

हे गणित देवी शत -शत प्रणाम,मैं आपको शीश झुकता हूँ,
आपकी औकात क्या है मैं बताता हूँ,

सुनते ही तेरा नाम काँप जाता है शरीर मेरा.
उठकर बैठ जाता हूँ पा ध्यान स्वप्न मे भी तेरा !

तेरी सूत्रों की माला कॊ दिन रात जपा मैं करता हूँ.
और फेल हो जाता हूँ तो भाग्य कोसने लगता हूँ.

श्री धराचार्य की परम प्रिये,आचार्य भास्कर की दादी,
न जाने कितने लडको की कर डाली तू ने बर्बादी,

बन गये बहूत अभिशाप पात्र,इस आर्यभट्ट की नानी ने.
डिप्लोमा तो कब का कर लेते पर हार गये गणित भवानी से,

तुम्हारा नाम सुन कर हम सब मन ही मन रो लेते है,
इस जीवन मे J E बनने की अभिलाषा खो देते है,

बीजगणित ने बो रखें है बीज असफलता के.
अंकगणित ने खो  डाला आत्मविश्वास जड़ से,

त्रिकोणमिती से अपना 36 का नाता है.
ऊँचाई और दूरी का सम्बन्ध समझ मे नही आता है,

समाकलन अवकलन  आदि के प्रश्न लगे मुझे दोषी.
सूत्रों कॊ जब याद करूँ तो आने लगती है बेहोशी,

नेर्देशान्क ठोस ज्यामिति बिन्दु दर बिन्दु  नचाती है.
"वेक्टर "के लिये बैठा हूँ तो नींद मेरी फैक्टर कर जाती है.
चिढ़ है मुझे गणितज्ञों से सूत्र बनाये जीन -जीन ने.
छपने मे समय नहीँ लगता है रट पाते है दिन भर मे,

सिधान्त बना कर चले गये.पढ़ना तो हमको पड़ता है.
उनकी छोटी सी गलती का अंजाम भुगतना पड़ता है.

डिप्लोमा मे रह कार कब तक फेल कराओगी.
डिग्री सेक्शन मे शोभामान रहो सम्मान असीमित पओगी.

जिस दिन तेरे जाने का समाचार अपने कानो से सुन पाऊँगा.
प्रसाद चढ़ा कर राम -राम कीर्तन करवाऊंगा.      

                                             -shyam ji prajapati 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें